‘वत्सला’ का सौ वर्षों का साथ आज विराम पर पहुंचा। पन्ना टाइगर रिज़र्व में आज दोपहर ‘वत्सला’ ने अंतिम सांस ली।

पन्ना टाइगर रिजर्व की गौरवशाली धरोहर, करीब 100 वर्ष तक वन्यजीवन की गौरवशाली यात्रा तय करने वाली दुनिया की सबसे बुजुर्ग हथिनी ‘वत्सला’ का अब हमारे बीच नहीं रहीं।
वत्सला का निधन पन्ना टाइगर रिज़र्व के लिए एक भावनात्मक क्षण है। ‘वत्सला’ केवल एक हाथी नहीं, बल्कि हमारी विरासत की प्रतीक और पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र थी।
वह मात्र हथिनी नहीं थी, हमारे जंगलों की मूक संरक्षक, पीढ़ियों की सखी और मप्र की संवेदनाओं की प्रतीक थीं।
टाइगर रिज़र्व की यह प्रिय सदस्य अपनी आंखों में अनुभवों का सागर और अस्तित्व में आत्मीयता लिए रहीं। उसने कैंप के हाथियों के दल का नेतृत्व किया और नानी-दादी बनकर हाथी के बच्चों की स्नेहपूर्वक देखभाल भी की।
वह आज हमारे बीच नहीं है, पर उसकी स्मृतियां हमारी माटी और मन में सदा जीवित रहेंगी।
‘वत्सला’ को विनम्र श्रद्धांजलि!
